HERBAL GARDEN
Vivek college of Ayurvedic Sciences & Hospital Bijnor UP
लज्जालु
Classification
चरक- सन्धानीय, पुरीषसंग्रहणीय
सुश्रुत- प्रियंग्वादि, अम्बष्ठादि
भावप्रकाश-
Synoyms
नमस्कारी- पत्रों के नमस्कार करने के समान सिकुड़ने से
शमीपत्रा- शमी सदृश पत्र होने से
खविरका- खदिर सदृश पत्र होने से
रक्तपादी- जड़ के लाल होने से
सभंगा- जमीन पर फैलने के कारण
Habit
इसका कांटेदार और प्रसरणशील क्षुप 1 मी. तक ऊँचा होता है।
Habitat
यह समस्त भारत के उष्ण क्षेत्रों में पाया जाता है।
Morphology
- इसका कांटेदार और प्रसरणशील क्षुप 1 मी. तक ऊँचा होता है।
-
पत्र पाणिवत् निकले हुए, 2-4 पक्षयुक्त, पत्रक 1.25 से. मी. तक लम्बे, रेखाकार, खदिर या इमली की पत्तियों के समान, 10-20 जोड़े होते हैं। स्पर्श से पत्तियां संकुचित हो जाती हैं।
-
पुष्प मुण्डक के रूप में, गोलाकार, गुलाबी रंग के तथा छोटे होते हैं।
-
फली 0.75 से. मी. तक लम्बी व सूक्ष्म कॉटों से युक्त होती है।
- बीज 35 होते हैं। पुष्मागम नवम्बर से मार्च तक एवं फलागम जनवरी से नई तक होता है।
Chemical Composition
Guna-Karma
Rasa- कषाय,तिक्त
Guna- लघु, रूक्ष
Virya- शीत
Vipaka- कटु
Karma- सन्थानीय
Doshakarma- कफपित्तशामक
Medicinal uses
अतिसार
प्रवाहिका
रक्तार्श
रक्तपित्
कुष्ठ
शोथ
प्रदर
धातुक्षत
भग्न
सर्पविष
Useful Part
पञ्चांग, मूल
Doses
मात्रा स्वरस 10-20 मि.ली.
Important Formulation
कुटजावलेह
लाक्षादिचूर्ण
Shloka
लज्जालुः स्याच्छमीपत्रा समङ्गा जलकारिका ।
रक्तपादी नमस्कारी नाम्ना खदिरकेत्यपि ।।
लज्जालुः शीतला तिक्ता कषाया कफपित्तजित् ।
रक्तपित्तमतीसारं योनिरोगान् विनाशयेत् ।।
(भा. प्र. नि. गुडूच्यादि वर्ग 272-273)
Hindi Name
छुईमुई
English Name
Touch me not
Botanical Name
Mimosa pudica Linn.
Family
Mimosaceae